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रामनगर-कच्ची दरगाह फोरलेन पर ब्रेक, जमीन विवाद से अटका निर्माण

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बिहार में भारतमाला परियोजना के तहत बन रही रामनगर-कच्ची दरगाह फोरलेन सड़क का निर्माण फतुहा अंचल में जमीन अधिग्रहण विवाद के कारण रुक गया है। मुआवजा और जमीन के स्वामित्व को लेकर मामला उलझा हुआ है।

जमीन विवाद में फंसा फोरलेन प्रोजेक्ट, निर्माण कार्य ठप

बिहार में सड़क नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में चल रही एक अहम परियोजना फिलहाल जमीन विवाद की वजह से अटक गई है। रामनगर से कच्ची दरगाह के बीच बन रही फोरलेन सड़क का निर्माण कार्य फतुहा अंचल में रुक गया है। यह सड़क भारतमाला परियोजना के तहत तैयार की जा रही है और इसे आमस-दरभंगा फोरलेन कॉरिडोर का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, जमीन अधिग्रहण, मुआवजा भुगतान और भूमि स्वामित्व को लेकर विवाद के कारण निर्माण एजेंसी को काम रोकना पड़ा है। इससे परियोजना की गति पर सीधा असर पड़ा है और स्थानीय स्तर पर भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

तीन साल से लंबित है जमीन अधिग्रहण का विवाद

सूत्रों के मुताबिक, इस परियोजना के लिए जिन जमीनों की जरूरत है, उनमें से कुछ हिस्सों पर पिछले तीन साल से अधिक समय से विवाद बना हुआ है।

एक ओर कुछ लोग संबंधित जमीन को अपनी रैयती जमीन बता रहे हैं, जबकि दूसरी ओर प्रशासनिक स्तर पर उसे सरकारी या गैर-मालिकाना श्रेणी में माना जा रहा है। इसी खींचतान के कारण जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया अंतिम रूप नहीं ले पा रही है।

यही वजह है कि निर्माण कार्य तय रफ्तार से आगे नहीं बढ़ सका और अब फतुहा क्षेत्र में यह काम लगभग ठहर गया है।

मुआवजे की राशि पर भी उठे सवाल

इस मामले में एक बड़ा मुद्दा मुआवजा राशि को लेकर भी सामने आया है। जमीन मालिकों का कहना है कि उन्हें वर्तमान बाजार दर के अनुसार भुगतान किया जाए, जबकि सरकारी प्रक्रिया पूर्व निर्धारित मानकों के आधार पर चल रही है।

स्थानीय दावेदारों का तर्क है कि जिस दर पर जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है, वह मौजूदा बाजार कीमत के मुकाबले कम है। यही कारण है कि कई लोगों ने मुआवजा लेने से पहले आपत्ति दर्ज कराई है।

अदालत में जमा है करोड़ों की मुआवजा राशि

प्रशासनिक जानकारी के अनुसार, फतुहा अंचल के चार मौजा—

रबियाचक, भेड़गामा, जैतिया और वाजिदपुर—में चिह्नित की गई जमीन के लिए मुआवजा राशि पहले से जमा है।

इन इलाकों में कुल 48.59 एकड़ जमीन को चिह्नित किया गया है और इसके एवज में करीब 25.342 करोड़ रुपये की राशि विशेष भू-अर्जन न्यायाधीश, व्यवहार न्यायालय, पटना में जमा कराई जा चुकी है।

इसके बावजूद जमीन का स्वामित्व स्पष्ट नहीं होने और दावों के निपटारे में देरी के कारण भुगतान और निर्माण दोनों अटके हुए हैं।

करीब 25 एकड़ जमीन पर सबसे ज्यादा पेंच

सूत्रों की मानें तो फतुहा अंचल में लगभग 25 एकड़ जमीन ऐसी है, जिस पर सबसे ज्यादा विवाद है।

हालांकि प्रशासन की ओर से जमीन का सीमांकन किया जा चुका है, लेकिन कई लोग उस भूमि पर निजी दावा कर रहे हैं। दूसरी ओर सरकारी अभिलेखों में उस जमीन को लेकर अलग स्थिति बताई जा रही है।

यानी मामला सिर्फ मुआवजे का नहीं, बल्कि इस बात का भी है कि जमीन वास्तव में निजी है या सरकारी।

दावेदारों को नोटिस, कागजात की जांच जारी

इस पूरे विवाद को सुलझाने के लिए संबंधित दावेदारों को नोटिस भेजा गया है। प्रशासन अब उनके द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों की जांच कर रहा है।

बताया जा रहा है कि जमीन की प्रकृति—यानी वह रैयती है या सरकारी—इस पर अंतिम रिपोर्ट तैयार की जा रही है। यह रिपोर्ट संबंधित राजस्व अधिकारियों के माध्यम से आगे बढ़ेगी, जिसके बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा।

यदि जमीन रैयती पाई जाती है, तो जमीन मालिकों को मुआवजा दिया जाएगा। लेकिन यदि जमीन सरकारी निकली, तो भुगतान की जगह केवल प्रशासनिक हस्तांतरण की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

फोरलेन के लिए कितनी जमीन चाहिए?

रामनगर-कच्ची दरगाह फोरलेन सड़क निर्माण के लिए कुल मिलाकर करीब 205 एकड़ जमीन की जरूरत है।

इसमें:

धनरूआ अंचल में लगभग 134.83 एकड़

फतुहा अंचल में लगभग 70.42 एकड़

जमीन अधिग्रहण के दायरे में लाई गई है।

इन जमीनों के बदले कुल 120.22 करोड़ रुपये मुआवजे के रूप में वितरित किए जाने हैं।

कई मौजों की जमीन परियोजना में शामिल

धनरूआ अंचल के कई मौजों की जमीन भी इस परियोजना में शामिल है। इनमें प्रमुख रूप से:

बघबर, बहरामपुर, पिपरावां, बिजपुरा, नसरतपुर, छाती, टरवां और पभेड़ा जैसे इलाके शामिल हैं।

इन क्षेत्रों में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया अपेक्षाकृत आगे बढ़ चुकी है, लेकिन फतुहा अंचल में विवाद की वजह से पूरी परियोजना की गति प्रभावित हो रही है।

क्यों अहम है यह सड़क परियोजना?

रामनगर-कच्ची दरगाह फोरलेन सड़क सिर्फ एक स्थानीय सड़क परियोजना नहीं है, बल्कि यह बिहार के बड़े सड़क ढांचे का हिस्सा है।

इस परियोजना के पूरा होने पर:

पटना क्षेत्र में ट्रैफिक दबाव कम होगा

लंबी दूरी की कनेक्टिविटी बेहतर होगी

माल और यात्री परिवहन में तेजी आएगी

भारतमाला परियोजना के तहत राज्य की लॉजिस्टिक क्षमता मजबूत होगी

यही कारण है कि इस सड़क का रुकना विकास योजनाओं के लिहाज से भी चिंता का विषय माना जा रहा है।

स्थानीय लोगों में भी असमंजस

एक ओर कुछ लोग सड़क निर्माण को विकास का रास्ता मान रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जमीन देने वाले परिवारों में मुआवजा और स्वामित्व को लेकर नाराजगी बनी हुई है।

कई लोगों का कहना है कि जब तक जमीन का मूल्यांकन और स्वामित्व स्पष्ट नहीं होगा, तब तक ऐसे विवाद बार-बार सामने आते रहेंगे।

निष्कर्ष

रामनगर-कच्ची दरगाह फोरलेन परियोजना बिहार के लिए एक महत्वपूर्ण सड़क योजना है, लेकिन फिलहाल यह जमीन अधिग्रहण, स्वामित्व विवाद और मुआवजा असहमति के कारण फंस गई है।

अब सबकी नजर प्रशासनिक जांच और अंतिम रिपोर्ट पर टिकी है। अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो यह परियोजना और ज्यादा देर तक अटकी रह सकती है, जिसका असर सीधे सड़क निर्माण और क्षेत्रीय विकास पर पड़ेगा।

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